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Dy.Commissiner VII UP SJAB Lucknow (India)

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Wednesday, March 24, 2010


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Sunday, March 21, 2010

ज्वलंत समस्या
प्रिय मित्र ,
कृपया विचार दीजिए
हमारे देश की प्रमुख समस्या क्या है ?
देश का जनसँख्या विस्फोट
महिला उत्पीडन (घरेलु या कार्यस्थल)
देश मे व्याप्त भ्रष्टाचार
(क) राजनैतिक भ्रष्टाचार
(ख) जनसेवक भ्रष्टाचार
(ग) न्यायाधीश भ्रष्टाचार
(घ) अधिकारी गण भ्रष्टाचार
(डं) कर्मचारी गण भ्रष्ट्राचार
(च) आम जनता द्वारा भ्रष्टाचार
(4)दहेज़ (लेना,देना,)या दहेज़ हत्या
(5)कन्या भ्रूण हत्या
(6)ऐड्स
(7)हेपेटाइटिस
(8)स्वाइन फ्लू
(9) या कोई अन्य
कृपया
उपरोक्त मे से एक या अधिक जो भी आपके अनुसार प्रभावी हो
अपने विचार स्पष्ठ लिखने का कष्ठ करें !

Sunday, March 14, 2010

आरक्षण

देश में जातीय आरक्षण के स्थान पर गरिवों को उन्नति करने के अवसर प्रदान करने चाहिए

जातीय आरक्षण से देश में जातीय विद्वेष फ़ैल रहा है जिससे समाज के टूटने का पूरा खतरा पैदा हो गया है!

इस देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंचने के बाद भी यदि किसी का दलितपन दूर नहीं हो पाया है तो फिर इस देश से कभी दलित एवम दलितपन समाप्त नहीं होगा

अब तक देश की सरकारों ने दलित के नाम पर सिर्फ वोट राजनीती ही की है... अपना दलितपन दूर किया है... कुर्सी से चिपके रहने का नुस्खा है ये !

सोचो जब एक कर्मचारी आरक्षण के बल पर जूनियर होते हुए भी अपने सवर्ण सीनियर का बॉस बन जाता है तो कैसा गुजरता होगा उस सवर्ण पर ?

मेरी समझ मे तो ये ही नहीं आता क़िकोई सम्पूर्ण जाती दलित कैसे हो सकती है ! जब क़ि उसी जाती के अनेक लोग देश के सर्वोच्च पदों पर बैठे हों ?

अगर ये मान भी लिया जाय क़ि कुछ सवर्णों ने कभी कुछ तथाकथित निम्न वर्ण के लोगों को सताया होगा जिससे दलित शब्द का उदय हुआ होगा

तो क्या मुझे कोई ये बताएगा क़ि पिता के किये किसी तथाकथित दुष्कर्म क़ी सजा बेटे को संविधान क़ी किस धरा के अंतर्गत दी जा सकती है ?

ये कौनसा प्राकृतिक न्याय है जिसमे पूर्वजों के किसी कृत्य क़ी सजा उनके वंसजों को ही नहीं वल्कि उसकी सम्पूर्ण जाती को दी जाती है ?

यदि ये उचित है तो अंग्रेजों को ऐसी कोई सजा क्यों नहीं दी गई जबकि उन्हों ने तो सम्पूर्ण देश को ही दलित बना दिया था ! लेकिन नहीं आज वे देश के आदर्श हैं !


देश क़ी राजनेतिक सोच तभी बदलेगी जब जन गण जागेगा !

Saturday, March 13, 2010

सिक्के के दो पहलू

हर सिक्के के दो पहलू होते है

सर्वमान्य सत्य है !
एकही बार मै सिक्के के दोनों पहलू नहीं देखे जा सकते है

पर मे मानता हूँ की ये अर्ध सत्य है
एक ही बार मे बिना सिक्के को बदले दूसरी ओर के पहलू को देखा जा सकता है ...................अगर !
आपके पास दर्पण हो ................

नक़ली चेहरों के पीछे छिपे मक्कार इरादों को देखा जा सकता है .......................अगर हो !
तेज निगाहों का दर्पण ...............
साहित्य का दर्पण .....................
सोच का दर्पण .........................
हो पक्का इरादा ................
सचाई का वादा...................
उच्च विचार और जीवन सादा....
कोशिश करने मे क्या हर्ज़ है,,,,,,,,,,,,,,,
क्यूंकि ......................
चलाना ही जिंदगी है ,रुकना है मौत तेरी....................
पुनश्च ---------
आशा ही जीवन है और निराशा ही मृत्यु.....................
सुना है ........................................
चल पड़े जिधर दो डग मग मे ,
उठ गए कोटि पग उसी ओर !

आओ .............
मिलकर......................
पहला क़दम रखने का प्रयास करें !

आचार्य

Friday, March 12, 2010

FIR SE नक़ली चेहरे

संसद मे जो कुछ हुआ महिला आरक्षण के नाम पर ,
उसके पीछे सांसदों की मंशा महिला सशक्तिकरण की तो बिलकुल है ही नहीं .............
विपक्ष के नेता जेटली जी का अभिकथन --------
हमने पिछले ६३ वर्षों मे यह अछि तरह समझ लिया है की बिना आरक्षण के महिलाओं की स्थिति नहीं सुधर सकती है इसलिए हम इस बिल का समर्थन कर रहे है !..............
कैसी विडम्बना है
एक चहरे पे कई चहरे लगा लेते है लोग
पुनश्च -------
नक़ली चेहरा सामने आये असली फितरत छुपी रहे !
सचमुच मे कोंग्रेस और बी जे पी दोनों
अब तक समुदाय विशेष के वोट बैंक के आधारपर ही संसद के गलियारों मे पहुँचती रही है
वर्तमान मे वाम दल भी कमोवेश ऐसी ही परिस्थितियों से गुजर रहे है
कोई एसा मुद्दा भी नहीं मिल रहा था जिससे जनता को और मुर्ख बनाया जा सके
महिला आरक्षण को बंद पोटली से निकला ही इस लिए गया है की इस पर देश की आधी आवादी को बेवकूफ बनाया जा सकता है ..............
एसा मे इसलिए आधिकारिक रूप से कह सकता हूँ की पिछले ६३ वर्षों मे (उदहारण के लिए) दलित और पिछड़े लोगों कोदिए जाने वाले आरक्षण से उत्पन्न स्थिति को ले लीजिए----------------
५०% लोगों को यह सुविधा इस लिए दी गयी थी जिससे ये लोग सशक्त हो सकें !
मुख्य धरा मे जुड़ सकें , आत्मबल प्राप्त कर सकें !
क्या हुआ ?????????
शायद अधिकतम ५%लोगों का सशक्तिकरण होपाया हो >?
परन्तु मुख्य धारासे कितने लोग जुड़े है जानना चाहेंगे ????>>>>>>>
कोई नहीं ------------------उन्होंने अपनी एक अलग धारा बना ली है -------------हर प्रान्त मे अलग धडा.........
पुरे समाज का विद्वेष पूर्ण बंटवारा ..............
जानते ही होंगे ये सब क्यों हो रहा है ?????
वोट ..........वोट ...................और वोट राजनीती
करण स्पष्ट है -----------------आरक्षण के पीछे.......... पहले पहल भले ही मुद्दा उनके सशक्तिकरण या............. मुख्य धारा से जोड़ने का ही रहा होगा,,,,,,,,, परन्तु बाद मे इसे आगे बदने के पीछे मंशा सिर्फ और सिर्फ वोट राजनीती ही था.......है ........और रहेगा !
देश की किसे चिंता है
वर्तमान मे यही तो हुआ है .................
तीनों बड़ी पार्टियाँ वोटों के लिए तरस रही है !जैसे तैसे जुगाड़ करते है तब जाकर सत्ता की चासनी से जाकर चिपक पाते है !
कोंग्रेस का वोट बैंक (दलित पिछड़े और अल्पसंख्यक )उसके नाग-पाश से मुक्त हो चुकी है
भा ज पा का हिन्दू कार्ड (जो खास तौर पर राम मंदिर अयोध्या के नाम पर जुड़ गया था ) अब तुरुप का पत्ता नहीं रहा
लाल झंडे वाली पार्टियाँ भी सामाजिक समता के खोखले नारों को कब तक वोटों मे बदल पाते !
करण सिर्फ एक ही है ------------नक़ली चेहरे
कुछ गिने चुने लोगों और उनके कुनवे खानदान को सत्ता सिंघासन तक पहुचने और फिर वहीँ जमे रहने के घिनोने षड़यंत्र का पर्दाफाश जैसे ही हुआ
सब कुछ बिखर गया
पुनः सत्ता से चिपके रहने को कोई नया शिगूफा चाहिए था .............मिल गया ----------------स्त्री सशक्तिकरण........... समाज मे बरावरी का दर्जा.............
सदियों से दबी पिसी नारी............ अब ठीक वैसे ही उपना लक्ष पा लेगी
जैसे दलितों ने पा लिया .<>>>>>.....सम्पूर्ण समाज अब उन्हें सम्मान देने लगा है ...........सबका उत्थान हो गया है
अब कोई जातीय विद्वेष बच नहीं गया है...........६३ वर्ष हो चुके है ...............सभी दलित अब दलितपन से मुक्त हो चुके है .............
कैसी विडम्बना है की एक बड़े मुस्लिम राष्ट्र से भी ज्यादा आवादी इस देश के मुस्लिमों की है फिर भी वे अल्पसंख्यक है................वाह,क्या बात है .............कोई भारतीय भारत मे ही अल्पसंख्यक.?............. केवल इसी देश मे हो सकता है ............कहने को ये देश "धर्मनिरपेक्ष " है ..........ना..ना धर्म और सम्प्रदाय के आधार पर यहाँ कोई फैसला नहीं होता............ ये तो आपकी सोच का ही दोष है

आज के लिए सिर्फ इतना ही ................शेष अगले अंक मे >>>>>>>>>>>>

आचार्य

Saturday, March 6, 2010

नक़ली चेहरे
यूँ तो दुनिया में बहुत सारे है सुखनवर,
(पर ),,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
ग़ालिब का है अंदाज़े बयां कुछ और !

कहने वाले ने तो कह दिया .............
क्या मिलिए ऐसे लोगों से
जिनकी फितरत छुपी रहे
नक़ली चेहरा सामने आये
असली सूरत छुपी रहे !

आज से हम भी देखेंगे
क्या है असली ??????????????????
क्या है नक़ली ???????????????????

आपसे सहयोग की अपेक्षा के साथ !
आज इतना ही !
स्वागत
आचार्य