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Dy.Commissiner VII UP SJAB Lucknow (India)

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Thursday, December 29, 2011

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सुना है ...
" सुना है वर्फ की चादर फ़ैली है पहाड़ों पर
सुना है ओस की वारिस हुई है देवदारों पर
सुना है सर्द है सूरज सुबह छुप गयी है कोहरे की रजाई में

सुना है सत्य के संकेत सीमित हैं बयानों तक
सुना है प्यार भी बिकने लगा है अब दुकानों पर
सुना है सड़कें रोनक हैं अँधेरे हैं मकानों पर
सुना है रात है गहरी कातिल बैठे हैं मचानो पर
सुना है इस सदी में न्याय की देवी की आँखें बंद हैं
सुना है मन्थराएं मंत्रणाएं कर रही हैं
सुना है स्वान के स्कूल में अब शेरों को पढ़ना है
सुना है शातिरों को शब्दकोषों पर भरोसा है
सुना है एक बूढ़े बाप ने दहेज़ जोड़ा है
सुना है दहेजखोर दामाद ने रिश्तों को निचोड़ा है

सुना है हमको खुदा से प्यार कम पर खौफ ज्यादा है


सुना है कोहरे में दिया दयनीय सा दिखने लगा है
सुना है पिता पर पैसा कम है पर प्यार ज्यादा है

सुना है मां की ममता खिलौनों की दुकानों से डरती है

सुना है एक मछली प्यासी हो कर पानी में ही मरती है
सुना है जिन्दगी जज़बात में सिमिटी है
सुना है एक तितली फूल के दामन से लिपटी है." -- राजी

साभार

"खामोश सी दिखती खला को खंगालो तो कोई ख्वाब दिखे
ख्वाब की तासीर पहचानो तो कुछ बात बने

रूह जब जागती और देह सोती हो जहाँ
ख्वाब खामोशी से उनवान लिखा करते हैं
देह वह पुल है जिसके ऊपर तारों से चमकते हैं ख्वाब
और इस पुल के नीचे बहुत दूर तलक
जिन्दगी दरिया सी बहा करती है
तुमने जाजवात के जख्मों को संजोया तो समझलो इतना
ख्वाब जब रूह से मिलते हैं तो इह्लाम हुआ करते हैं
ख्वाब जब देह से मिलते हैं तो इल्जाम हुआ करते हैं
ख्वाब जब आँख में हों तो आंसू बन कर अपने अहसास को अकेले में नमी दिया करते हैं
ख्वाब गर हों तेरी आँख में तो सहेजो इनको
ख्वाब में दर्ज हैं ख्वाहिश की इबारत यारो
हकीकत जब हाशिये पर हो, हसरतें हांफती हों
ख्वाब में खोजो कोई उनवान पढो
ख्वाब की तासीर पहचानो तो कुछ बात बने
जिन्दगी हर ख्वाब की ख्वाहिश ही हुआ करती है ."
---- रा. च.

Wednesday, December 28, 2011


"कुछ ने रिश्तों को कुछ नाम दिया
कुछ ने रिश्तों को बदनाम किया
हम तो रास्तों के मुसाफिर थे रिश्ते बनाते तो बनाते कैसे ?"

Monday, December 26, 2011

ये मसाइले तसव्वुफ़ ये तेरा बयान गालिब

तुम हम बलि समझते जो न बादाख्‍खार होता

ईश्‍वरीय प्रेम की ये अदभुत बातें , कि वेद ईर्ष्‍या करें।

ये मसाइले-तसव्वुफ़.....

सूफियाना बातें। ये मस्‍ती की बातें।

ये तेरा बयान ग़ालिब

और तेरा कहने का यह अनूठा ढंग, कि उपनिषाद शर्मा जाएं।

पहले घर के भेदियो के सर उडाये जायेंगे..

सांप आस्तीनों के न जब तक मारे जायेंगे..
हौंसला कितना भी हो हम जंग हारे जायेंगे..
दुश्मनों की मारकाट तो बाद में होगी..
पहले घर के भेदियो के सर उडाये जायेंगे..

मुल्ला अग्निवेश कल जामा मस्जिद दिल्ली में एक सभा में गया था , कथित बाबरी मस्जिद को दुबारा बनाने की माग हो रही थी, जिसमे अग्निवेश ने भी बोला की आडवानी और मुरली जोशी को तुरंत गिरफ्तार करना चाहिए और दुबारा से कथित बाबरी मस्जिद को बनाना चाहिए ! अग्निवेश ने संघ और बजरंग दल को बैन करने की भी मांग की है ! अग्निवेश ने बोला की ..क्या साबुत है आडवानी के पास की राम का जन्म स्थान यही पर है ! इस मौके पर उसके साथ जामा मस्जिद के इमाम और इलाके के विधायक शोइब इकबाल भी साथ में था ! अब बहुत हो गया, इस अग्निवेश को कुछ करना पड़ेगा ! महंत नित्यान्नद जी ने एक बार इसको धोया था लगता है की अब ये भूल गया है उस धुलाई को ! सब से पहले इसका भगवा वस्त्र उतरना पड़ेगा !
जय श्री राम जय भारत !!

देशद्रोही की कुछ तस्वीरें...




किताबो के पन्ने पलट के सोचता हूँ
यू पलट जाय मेरी जिंदगी तो क्या बात है
ख्वाबों में जो रोज मिलते है
जो हकीकत में आये तो क्या बात है
कुछ मतलब के लिए ढूढ़ते है सब मुझको
बिन मतलब जो आये तो क्या बात है
कत्ल करके तो सब ले जायेंगे दिल मेरा
कोई बातो से ले जाये तो क्या बात है
जो शरीफों की शराफत में बात न हो
एक शराबी कह जाये तो क्या बात है
अपने रहने तक तो ख़ुशी दूंगा सबको
जो किसी को मौत पे ख़ुशी दे जाये तो क्या बात है

सिक्किम भूकंप राहत कार्यक्रम |

सिक्किम भूकंप राहत कार्यक्रम के अंतर्गत राहत सामग्री वितरण हेतु ले जाते हुए |
सिक्किम रेड क्रास कार्यालय में
ज्वाइंट सेक्रेटरी के साथ भूकंप
पीड़ितों को राहत सामग्री वितरण
पर चर्चा करते हुए |
डा.एल एस आचार्य
डिप्टी कमिश्नर,
७ वीं वाहिनी, एस.जे.ए.बी. लखनऊ
"सवाल यह नहीं है कि अन्ना RSS के
एजेंट हैं या सोनिया CIA की या दिग्विजय किसके दलाल हो कर मालामाल हैं या
प्रणब मुखर्जी किसकी बदौलत गोलमाल हैं. सभी जानते हैं कि मन मोहन सिंह को
हमने नहीं चुना फिर भी वह फर्जी पता दर्ज करवा कर अमेरिका के एजेंट बन कर
देश के प्रधान मंत्री हैं. सभी जानते हैं इधर शिखंडी और उधर पाखंडी हैं.
टीम आन्ना की NGO मार्का टीम में स्वनामधन्य परजीवी फंडभक्षी हैं जिसमें
त्रेता के खर-दूषण जैसे प्रतिभा संपन्न प्रशांत भूषण हैं, किरण बेदी हैं,
सुल्तानपुर में कोलेजों को अनुदान दिलाने के नाम पर मोटी रकम डकार चुके संजय सिंह हैं, कुछ पाखंडी और शिखंडी कवि हैं
तो
दूसरी ओर आसान किश्तों में तिहाड़ जेल जाता मनमोहन मंत्रीमंडल. सवाल यह भी
है कि टीम अन्ना हो या राम देव इन्हें सोनिया भ्रष्ट दिखती हैं मायाबती
ईमानदार ? पर अभी इन सवालों में नहीं उलझिए अभी तो सवाल है भ्रष्टाचार के
अचार से कैसे निपटने का कारगर नुश्खा तैयार हो और देश का विदेश में जा चुका
काला धन कैसे वापस आये. सोनिया -मनमोहन ने देश को दीवालिया बना दिया है.
प्रणव मुखर्जी कहते हैं कि अगर काला धन वालों के नाम उजागर हो गए तो दुनिया
के तमाम देश हमसे नाराज़ हो जायेंगे. सवाल यह भी है कि इनकी देश की जनता के
प्रति जवाबदेही है या अन्य देशों के प्रति ?
बहकावे
में मत आओ !! मत भूले कि भ्रष्टाचार से लड़ने का समय आ चुका है और इसके लिए
अन्ना एक कारगर औज़ार हैं. भ्रष्टाचार से जूझती जनता के लिए दधीची हैं
अन्ना. भ्रष्टाचार के शिखर पर बैठी इस सोनिया -मनमोहन सरकार की जवाबदेही
पहले है.

न इधर उधर की तू बात कर
ये बता कि कारवाँ क्यों लुटा
मुझे रहजनो से गिला नहीं
तेरी रहबरी का सवाल है."