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Saturday, May 28, 2011

saabhar

EK Insaan--Anek Insaan ----Anek ..anek ..anek ...... Insaan ...---Jab badenge ek saath --- ban jayen ge ek ...... TUFAAN ..!!......!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
Veena Srivastava27 मई 21:22
EK Insaan--Anek Insaan ----Anek ..anek ..anek ...... Insaan ...---Jab badenge ek saath --- ban jayen ge ek ...... TUFAAN ..!!......!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा विधेयक

Suresh Chiplunkar11:46am May 28
सोनिया गाँधी के "निजी मनोरंजन क्लब" यानी नेशनल एडवायज़री काउंसिल (NAC) द्वारा सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा विधेयक का मसौदा तैयार किया गया है जिसके प्रमुख बिन्दु इस प्रकार हैं-

1) कानून-व्यवस्था का मामला राज्य सरकार का है, लेकिन इस बिल के अनुसार यदि केन्द्र को "महसूस" होता है तो वह साम्प्रदायिक दंगों की तीव्रता के अनुसार राज्य सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप कर सकता है और उसे बर्खास्त कर सकता है…

(इसका मोटा अर्थ यह है कि यदि 100-200 कांग्रेसी अथवा 100-50 जेहादी तत्व किसी राज्य में दंगा फ़ैला दें तो राज्य सरकार की बर्खास्तगी आसानी से की जा सकेगी)…

2) इस प्रस्तावित विधेयक के अनुसार दंगा हमेशा "बहुसंख्यकों" द्वारा ही फ़ैलाया जाता है, जबकि "अल्पसंख्यक" हमेशा हिंसा का लक्ष्य होते हैं…

3) यदि दंगों के दौरान किसी "अल्पसंख्यक" महिला से बलात्कार होता है तो इस बिल में कड़े प्रावधान हैं, जबकि "बहुसंख्यक" वर्ग की महिला का बलात्कार होने की दशा में इस कानून में कुछ नहीं है…

4) किसी विशेष समुदाय (यानी अल्पसंख्यकों) के खिलाफ़ "घृणा अभियान" चलाना भी दण्डनीय अपराध है (फ़ेसबुक, ट्वीट और ब्लॉग भी शामिल)…

5) "अल्पसंख्यक समुदाय" के किसी सदस्य को इस कानून के तहत सजा नहीं दी जा सकती यदि उसने बहुसंख्यक समुदाय के व्यक्ति के खिलाफ़ दंगा अपराध किया है (क्योंकि कानून में पहले ही मान लिया गया है कि सिर्फ़ "बहुसंख्यक समुदाय" ही हिंसक और आक्रामक होता है, जबकि अल्पसंख्यक तो अपनी आत्मरक्षा कर रहा है)…

इस विधेयक के तमाम बिन्दुओं का ड्राफ़्ट तैयार किया है, सोनिया गाँधी की "किचन कैबिनेट" के सुपर-सेकुलर सदस्यों एवं अण्णा को कठपुतली बनाकर नचाने वाले IAS व NGO गैंग के टट्टुओं ने… इस बिल की ड्राफ़्टिंग कमेटी के सदस्यों के नाम पढ़कर ही आप समझ जाएंगे कि यह बिल "क्यों", "किसलिये" और "किसको लक्ष्य बनाकर" तैयार किया गया है…। "माननीय"(?) सदस्यों के नाम इस प्रकार हैं - हर्ष मंदर, अरुणा रॉय, तीस्ता सीतलवाड, राम पुनियानी, जॉन दयाल, शबनम हाशमी, सैयद शहाबुद्दीन… यानी सब के सब एक नम्बर के "छँटे हुए" सेकुलर… । "वे" तो सिद्ध कर ही देंगे कि "बहुसंख्यक समुदाय" ही हमलावर होता है और बलात्कारी भी…

अब यह विधेयक संसद में रखा जाएगा, फ़िर स्थायी समिति के पास जाएगा, तथा अगले लोकसभा चुनाव के ठीक पहले इसे पास किया जाएगा, ताकि मुस्लिम वोटों की फ़सल काटी जा सके तथा भाजपा की राज्य सरकारों पर बर्खास्तगी की तलवार टांगी जा सके…। यह बिल लोकसभा में पास हो ही जाएगा, क्योंकि भाजपा(शायद) के अलावा कोई और पार्टी इसका विरोध नहीं करेगी…। जो बन पड़े उखाड़ लो…

फ़िलहाल अति-व्यस्तता एवं कम्प्यूटर की खराबी की वजह से विस्तृत ब्लॉग नहीं लिख पा रहा हूँ, परन्तु इस विधेयक के प्रमुख बिन्दु आपके सामने पेश कर दिये हैं… ताकि भविष्य में होने वाले दंगों के बाद की "तस्वीर" आपके सामने स्पष्ट हो सके…

Tuesday, May 24, 2011


Durga Prasad23 मई 23:20
Kabhi ati hai,
Khamoshi say,
Chupkey Say,
Rat mein,
Barsat mein,
Veeraney main,
Anjaney main,
Kise waja say,
Kis liye,
Kis ki khater,
Kis k liey,
Ye keya hey,
Ek ehsasss,
Ek pyass,
Phir bhi acchi lagti hai,
Unjani si,
Begaani si,
Phachaani si,
Khoobsurat si,
Tumhari yaad.
“GOOD NIGHTâ€

दगा देने कि तैयारी

Murari Sharan Shukla posted in Luckhnawi.
दगा देने कि तैयारी  दगा शब्द राजनीति में नया नहीं है ! समय के साथ राजनीति किस तरह रंग बदलती है, इसका एक और उदाहरण हाल ही में हुए पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव के बाद देखने को मिला ! तमिलनाडु में द्रमुक से गठबंधन की बदौलत ही वर्ष २००४ के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को केंद्रीय सत्ता की दौड़ में राजग से बढ़त मिल गयी थी ! वर्ष २००९ के लोकसभा चुनावों के बाद सत्ता बरक़रार रखने में भी द्रमुक के १९ संसदों की भूमिका महत्वपूर्ण रही, लेकिन अब जब विधान सभा चुनावों में मतदाताओं ने द्रमुक को ठुकरा दिया है तो अगले दिन ही कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी का फोन धुर विरोधी अन्नाद्रमुक प्रमुख जिन्हें इस बार प्रचंड बहुमत मिला है, को पहुँच गया ! बहाना बधाई का था, पर न्योता चाय का दे डाला ! इस अवसरवाद पर कांग्रेस प्रवक्ता ने सफाई दी की सोनिया ने तो सभी जीतने वाले मुख्यमंत्रियों को बधाई दी है, यह महज शिष्टाचार है, इसमे राजनीति नहीं देखनी चाहिए ! चलिए नहीं देखते राजनीति इस बात में, परन्तु इस सवाल का जबाब कांग्रेस में किसी के पास नहीं है कि सोनिय ने चाय पर कितने नए मुख्यमंत्रियों को बुलाया है ?
Murari Sharan Shukla24 मई 13:29
दगा देने कि तैयारी
दगा शब्द राजनीति में नया नहीं है ! समय के साथ राजनीति किस तरह रंग बदलती है, इसका एक और उदाहरण हाल ही में हुए पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव के बाद देखने को मिला ! तमिलनाडु में द्रमुक से गठबंधन की बदौलत ही वर्ष २००४ के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को केंद्रीय सत्ता की दौड़ में राजग से बढ़त मिल गयी थी ! वर्ष २००९ के लोकसभा चुनावों के बाद सत्ता बरक़रार रखने में भी द्रमुक के १९ संसदों की भूमिका महत्वपूर्ण रही, लेकिन अब जब विधान सभा चुनावों में मतदाताओं ने द्रमुक को ठुकरा दिया है तो अगले दिन ही कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी का फोन धुर विरोधी अन्नाद्रमुक प्रमुख जिन्हें इस बार प्रचंड बहुमत मिला है, को पहुँच गया ! बहाना बधाई का था, पर न्योता चाय का दे डाला ! इस अवसरवाद पर कांग्रेस प्रवक्ता ने सफाई दी की सोनिया ने तो सभी जीतने वाले मुख्यमंत्रियों को बधाई दी है, यह महज शिष्टाचार है, इसमे राजनीति नहीं देखनी चाहिए ! चलिए नहीं देखते राजनीति इस बात में, परन्तु इस सवाल का जबाब कांग्रेस में किसी के पास नहीं है कि सोनिय ने चाय पर कितने नए मुख्यमंत्रियों को बुलाया है ?

अवसरवाद


तमाचा छाप की काली छाया मीठा-मीठा गप-गप   कड़वा-कड़वा थू-थू  राजनीति की तो फितरत ही है अवसरवाद ! पर देश कि सबसे पुराणी पार्टी कांग्रेस कि महिमा वाकई अपरम्पार है ! हाल के विधानसभा चुनावों में वह पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के साथ कनिष्ठ भागिदार थी तो तमिलनाडु में करूणानिधि की द्रमुक के साथ ! पश्चिम बंगाल में ममता की जीत का परचम लहराया तो तमिलनाडु में द्रमुक की लुटिया बुरी तरह डूब गयी ! उधर चुनाव नतीजे आये, इधर कांग्रेस के सुर बदल गए ! बंगाल में कांग्रेस ममता की जीत में ''बेगानी शादी में अब्दुला दीवाने'' की तरह अपनी पीठ थपथपा रही थी तो तमिलनाडु में अपने गठबंधन को विपक्ष के नेता की हैसियत भी न मिल पाने पर टिपण्णी आई की वहाँ तो हमारा कुछ दांव पर ही नहीं था ! यह हाल तो तब है कि पिछली विधानसभा के मुकाबले कांग्रेस की २० सीटों की ज्यादा मांग ने चुनाव पूर्व ही गठबंधन दांव पर लगा दिया था ! भ्रष्टाचार, कुशासन और परिवारवाद के बोझ तले दबे करूणानिधि तो झुक गए, पर मतदाताओं ने दोनों को अर्श से फर्श पर ला दिया !
Murari Sharan Shukla

तमाचा छाप की काली छाया
मीठा-मीठा गप-गप
कड़वा-कड़वा थू-थू
राजनीति की तो फितरत ही है अवसरवाद !
पर देश कि सबसे पुराणी पार्टी कांग्रेस कि
महिमा वाकई अपरम्पार है ! हाल के विधानसभा
चुनावों में वह पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की
तृणमूल कांग्रेस के साथ कनिष्ठ भागिदार थी तो
तमिलनाडु में करूणानिधि की द्रमुक के साथ !
पश्चिम बंगाल में ममता की जीत का परचम
लहराया तो तमिलनाडु में द्रमुक की लुटिया बुरी तरह
डूब गयी ! उधर चुनाव नतीजे आये, इधर कांग्रेस के
सुर बदल गए ! बंगाल में कांग्रेस ममता की जीत में
''बेगानी शादी में अब्दुला दीवाने'' की तरह अपनी पीठ
थपथपा रही थी तो तमिलनाडु में अपने गठबंधन को
विपक्ष के नेता की हैसियत भी न मिल पाने पर टिपण्णी
आई की वहाँ तो हमारा कुछ दांव पर ही नहीं था !
यह हाल तो तब है कि पिछली विधानसभा के मुकाबले
कांग्रेस की २० सीटों की ज्यादा मांग ने चुनाव पूर्व ही
गठबंधन दांव पर लगा दिया था ! भ्रष्टाचार, कुशासन
और परिवारवाद के बोझ तले दबे करूणानिधि तो झुक गए,
पर मतदाताओं ने दोनों को अर्श से फर्श पर ला दिया !

Tuesday, May 10, 2011

साभार

दाऊद की कंपनी को मिला था लादेन की हवेली बनवाने का ठेका?


अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन पाकिस्‍तान के ऐबटाबाद स्थित जिस हवेली में मारा गया, वह इमारत अमेरिकी अधिकारियों के खुफिया ठिकानों और बंकर जैसे घरों के समान थी जो जंग के मैदान में बनाए जाते हैं।खुफिया विभाग के उच्‍च पदस्‍थ सूत्रों के मुताबिक पाकिस्‍तान में इस तरह के मकान बनाने का काम सफारी कंस्‍ट्रक्‍शंस के जिम्‍मे है। बताया जाता है कि कुख्‍यात अंडरवर्ल्‍ड दाऊद इब्राहिम और उसके दाहिने हाथ छोटा शकील इस कंपनी के मालिक हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने दाऊद की कंस्‍ट्रक्‍शन कंपनी की मदद से गुपचुप तरीके से लादेन की इमारत बनवाई थी। ओसामा की हवेली की बुलेट प्रूफ खिड़कियां और इसके मजबूत दीवार बनाने में इस्‍तेमाल किए गया कच्‍चा सामान दाऊद की कंस्‍ट्रक्‍शन कंपनी ने मुहैया कराया था जो सेना की इमारतें बनाने के लिए भी कच्‍चे सामान की आपूर्ति करती है।


Monday, May 9, 2011

साभार

साभार,एफबीआई की नई सूची के मुताबिक ये हैं दुनिया के बड़े आतंकवादी



एडम
याहिए गदाहन:
उम्र 32 साल, ओरेगन में जन्‍मा और कैलिफोर्निया में पला-बढ़ा। 17
साल की उम्र में इस्‍लाम धर्म कबूल किया। गदाहन पर देशद्रोह और अल कायदा के नेटवर्क
को साजो सामान मुहैया कराने के आरोप। अल कायदा के लिए कई आतंकी गतिविधियों को अंजाम
देने के आरोप। गिरफ्तारी पर 10 लाख डॉलर का ईनाम।
डेनियल एंड्रियस सैन
डिएगो:
उम्र 33 साल, अमेरिकी नागरिक और कम्‍प्‍यूटर नेटवर्क संचालित करने में
माहिर। सैन डिएगो पर 2003 में सैन फ्रांसिस्‍को में दो इमारतों में बम धमाके का
आरोप। एफबीआई के मुताबिक डिएगो ने जानवरों के अधिकार के लिए लड़ रहे अतिवादी
संगठनों से जुड़ाव। गिरफ्तारी पर ढाई लाख डॉलर का ईनाम।
अयमान अल
जवाहिरी:
उम्र 59 साल। मिस्र मूल के नागरिक अल जवाहिरी पर तंजानिया और के‍न्‍या
में अमेरिकी दूतावासों में 7 अगस्‍त 1998 को हुए बम धमाकों की साजिश का आरोप है।
पेशे से डॉक्‍टर अल जवाहिरी इजीप्टियन इस्‍लामिक जिहाद का संस्‍थापक है और अब यह अल
कायदा से जुड़ा है। अल जवाहिरी को अल कायदा का ऑपरेशनल कमांडर माना जाता है और अब
बिन लादेन की मौत के बाद इसे ही अल कायदा का सर्वेसर्वा माना जा रहा है। अमेरिकी
सरकार ने इसकी गिरफ्तारी पर ढाई करोड़ डॉलर का ईनाम रखा है।
फहद मोहम्‍मद
अहमद अल कुसो:
उम्र 36 साल, यमन का ना‍गरिक अल कुसो 12 अक्‍टूबर 2000 को अदन
में अमेरिकी नौसेना के पोत यूएसएस कोल पर विस्‍फोट मामले का आरोपी है जिसमें 17
अमेरिकी नाविकों की मौत हो गई थी। इसकी गिरफ्तारी पर 50 लाख डॉलर का ईनाम
है।
जमीन अहमद मोहम्‍मद अली अल बदावी: उम्र-50 के करीब, अल बदावी पर
भी 12 अक्‍टूबर 2000 को अमेरिकी पोत पर हुए धमाकों का आरोप है। अल बदावी को यमन के
अधिकारियों ने उस वक्‍त पकड़ लिया था जब वह अप्रैल 2003 से जेल से भाग रहा था। उसे
मार्च 2004 में फिर से पकड़ा गया लेकिन 3 फरवरी 2006 को फिर से भाग निकला। उसकी
गिरफ्तारी पर 50 लाख डॉलर का ईनाम है।

मोहम्‍मद अली हमीदी: उम्र 46 साल, हिजबुल्‍ला का सदस्‍य। विमान अपहरण और
अमेरिकी नौसैनिक की हत्‍या के आरोप। ईनाम 50 लाख डॉलर।

अली अतवा: उम्र 50 साल, यह भी हिजबुल्‍ला से जुड़ा। अली अतवा पर भी हमीदी
जैसे आरोप। ईनाम 50 लाख डॉलर।

हसन इज्‍ज-अल-दीन: उम्र 47 साल, हसन भी हिजबुल्‍ला का सदस्‍य और इस पर भी
हमीदी और अल अतवा के साथ आरोपी। ईनाम 50 लाख डॉलर।

अब्‍दुल्‍ला अहमद अब्‍दुल्‍ला: उम्र 47 साल, मिस्र मूल के अब्‍दुल्‍ला पर
तंजानिया और केन्‍या में अमेरिकी दूतावासों पर हुए बम धमाके के आरोप। ईनाम 50 लाख
डॉलर।