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Saturday, March 13, 2010

सिक्के के दो पहलू

हर सिक्के के दो पहलू होते है

सर्वमान्य सत्य है !
एकही बार मै सिक्के के दोनों पहलू नहीं देखे जा सकते है

पर मे मानता हूँ की ये अर्ध सत्य है
एक ही बार मे बिना सिक्के को बदले दूसरी ओर के पहलू को देखा जा सकता है ...................अगर !
आपके पास दर्पण हो ................

नक़ली चेहरों के पीछे छिपे मक्कार इरादों को देखा जा सकता है .......................अगर हो !
तेज निगाहों का दर्पण ...............
साहित्य का दर्पण .....................
सोच का दर्पण .........................
हो पक्का इरादा ................
सचाई का वादा...................
उच्च विचार और जीवन सादा....
कोशिश करने मे क्या हर्ज़ है,,,,,,,,,,,,,,,
क्यूंकि ......................
चलाना ही जिंदगी है ,रुकना है मौत तेरी....................
पुनश्च ---------
आशा ही जीवन है और निराशा ही मृत्यु.....................
सुना है ........................................
चल पड़े जिधर दो डग मग मे ,
उठ गए कोटि पग उसी ओर !

आओ .............
मिलकर......................
पहला क़दम रखने का प्रयास करें !

आचार्य

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