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Thursday, June 2, 2011

भारत को हौव्वा समझना पाकिस्तान की भूल: ओबामा

भारत को हौव्वा समझना पाकिस्तान की भूल: ओबामा

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि उनकी समझ के अनुसार पाकिस्तान ने भारत को हौव्वा बना रखा है और वो भारत को अपने अस्तित्व के लिए खतरा समझते हैं जो एक बड़ी भूल है.

बीबीसी के साथ एक विशेष बातचीत में ओबामा ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच शांति से पाकिस्तान को ही फायदा होगा क्योंकि इससे संसाधनों का उपयोग व्यापार और वाणिज्य के लिए हो सकेगा.

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यह पूछे जाने पर कि पिछले दिनों ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने पाकिस्तान के बारे में कहा था कि वो चरमपंथ पर दोनों तरह की बातें करता है और इससे कैमरुन को परेशानी हुई थी, ओबामा का कहना था, ‘‘पाकिस्तान के लिए भारत एक हौव्वा है. वो भारत को अपने अस्तित्व पर खतरा समझता है जो उसकी भूल है.’’

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ओबामा का कहना था, ‘‘अगर भारत-पाकिस्तान के बीच शांति हो तो फायदा पाकिस्तान का है. संसाधन मुक्त होंगे तो इसका इस्तेमाल व्यापार के लिए होगा और पाकिस्तान भी प्रगति कर सकेगा जैसा भारत कर रहा है.’’

उन्होंने इसे और स्पष्ट करते हुए कहा कि पाकिस्तान हर मुद्दे को भारत के हिसाब से देखता है. उनका कहना था, ‘‘ पाकिस्तान की सोच ही ऐसी है. अफ़गानिस्तान का मुद्दा हो या सीमावर्ती क्षेत्रों का, वो इसे इस नज़रिए से देखता है कि इसका असर भारत और हमारे संबंधों पर क्या होगा.’’

गर भारत-पाकिस्तान के बीच शांति हो तो फायदा पाकिस्तान का है. संसाधन मुक्त होंगे तो इसका इस्तेमाल व्यापार के लिए होगा और पाकिस्तान भी प्रगति कर सकेगा जैसा भारत कर रहा है

बराक ओबामा

ओबामा का कहना था कि पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा उसकी ज़मीन पर ही है और अमरीका कोशिश कर रहा है कि पाकिस्तान इस बात को समझे और इसे अपनी सोच में शामिल करे.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को ये समझना होगा कि अगर पाकिस्तान ये नहीं समझेगा कि उनके पुलिस थानों को, आम जनता को और चुने गए प्रतिनिधियों पर हमला करने वाले नेटवर्क को तोड़ना ज़रुरी है तो फिर देश को अस्थायित्व से कोई रोक नहीं सकेगा.

गुप्त अभियान के लिए तैयार

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संकेत दिया है कि पाकिस्तान के साथ विवादों के बावजूद वो पाकिस्तान में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ गुप्त अभियान को मंजूरी देने के लिए तैयार हैं.

उल्लेखनीय है कि अमरीका ने पाकिस्तान में एक गुप्त अभियान में अल क़ायदा नेता ओसामा बिना लादेन को निशाना बनाया था जिसके बाद पाकिस्तान और अमरीका के रिश्तों में दरार आ गई है.

हम पाकिस्तान की संप्रभुता का सम्मान करते हैं लेकिन हम किसी को अनुमति नहीं दे सकते कि वो अमरीका या उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ हमलों की योजनाएं बनाए

बराक ओबामा

ओबामा का कहना था कि अमरीका को पाकिस्तान की संप्रभुता का ख़्याल है लेकिन अमरीका किसी को भी अनुमति नहीं दे सकता कि वो अमरीका और उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ हमलों की योजना बनाए और अमरीका उस पर कार्रवाई न करे.

हालांकि राष्ट्रपति ओबामा ने माना कि अफ़गानिस्तान में हिंसा को समाप्त करने के लिए तालिबान के साथ गंभीर वार्ताएं ज़रुरी ही होंगी.

राष्ट्रपति बराक ओबामा अपने यूरोप दौरे से पहले बीबीसी से विशेष बातचीत कर रहे थे.

यह पूछे जाने पर कि अगर उन्हें अल क़ायदा के किसी बड़े नेता या तालिबाने बड़े नेता मुल्ला उमर की पाकिस्तान या किसी अन्य देश में मौजूदगी के बारे में पता चले तो वो क्या करेंगे, ओबामा का जवाब था, ‘‘हमारा काम अमरीका की रक्षा करना है.’’

ओबामा का कहना था, ‘‘हम पाकिस्तान की संप्रभुता का सम्मान करते हैं लेकिन हम किसी को अनुमति नहीं दे सकते कि वो अमरीका या उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ हमलों की योजनाएं बनाए.’’

उन्होंने कहा, ‘‘ हम किसी भी ऐसी योजना को फलीभूत होने नहीं दे सकते. हम उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगे.’’

तनावपूर्ण रिश्ते

दो मई को अमरीका की कमांडो कार्रवाई में अल क़ायदा नेता बिन लादेन की मौत हो गई थी. अमरीकी कमांडो ने पाकिस्तान के ऐबटाबाद शहर में यह कार्रवाई की थी.

ऐबटाबाद के जिस परिसर में लादेन मारे गए वो पाकिस्तानी सैन्य अकादमी के पास ही है और लादेन के पाकिस्तान में मिलने से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि वो लादेन को समर्थन दे रहे थे.

हालांकि पाकिस्तान की सरकार ने इस तरह के आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि अमरीकी हमले ने पाकिस्तानी संप्रभुता को ठेस पहुंचाई है.

आखिरकार हमें तालिबान से बात करनी होगी. तालिबान को अल क़ायदा से अपने संबंध तोड़ने होंगे. हिंसा छोड़नी होगी और अफ़गानिस्तान के संविधान का सम्मान करना होगा

बराक ओबामा

इसी महीने पाकिस्तानी सांसदों ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा है कि पाकिस्तान आगे से ‘ऐसी कोई कार्रवाई बर्दाश्त नहीं करेगा और ऐसी कोई एकतरफा कार्रवाई क्षेत्र और पूरी दुनिया की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा साबित होगी.’

अफ़गानिस्तान में चरमपंथ के ख़िलाफ चल रहे युद्ध में पाकिस्तान की बड़ी भागेदारी रही है.

हालांकि पाकिस्तान की ज़मीन से पाकिस्तान अफ़गानिस्तान क्षेत्र में अमरीका के ड्रोन हमले दोनों देशों के बीच तनाव की एक बड़ी वजह रहे हैं.

अफ़गानिस्तान के बारे में ओबामा का कहना था कि यह संघर्ष सेना के स्तर पर सुलझ नहीं सकता है. उनका कहना था कि तालिबान को पीछे धकेलना होगा ताकि वो राजनीतिक समझौते के लिए तैयार हों.

उन्होने कहा, ‘‘ आखिरकार हमें तालिबान से बात करनी होगी. तालिबान को अल क़ायदा से अपने संबंध तोड़ने होंगे. हिंसा छोड़नी होगी और अफ़गानिस्तान के संविधान का सम्मान करना होगा.’’

ओबामा रविवार से यूरोप की यात्रा शुरु कर रहे हैं और इस यात्रा में वो ब्रिटेन, फ्रांस और पोलैंड जाएंगे.

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