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Thursday, April 7, 2011

" हम कोलंबस हैं हमारे हाथों में भूगोल की किताबें नहीं होतीं,
हमारी निगाहों में स्कूल की कतारें नहीं होती,
हमारे घर से लाता नहीं टिफिन कोई,
तुम्हारी तरह हमको पिता दिशा नहीं समझाता,
तुम्हारी तरह हमें तैरना नहीं सिखलाता,
हमारे घर पर इंतज़ार करती माएं नहीं होती.

हम कोलंबस हैं हमारे हाथ में होती हैं पतवारें,
हमारी निगाह में रहती हैं नाव की कतारें,
हमारे पिता ने निगाह दी तारों से दिशा पहचानो,
हमारे पिता ने समझाया तूफानों की जिदें मत मानो,
हमारी मां यादों में बस सुबकती है आंसू से रोटी खाती है,
स्कूलों की छुट्टी के वख्त हमारी मां भी समंदर तक आके लौट जाती है,
मेरी मां जानती है में कभी न आऊँगा फिर भी मेरी सालगिरह मनाती है.

तुम किनारे चले जज़बात हो, जरूरत, सियासत या साहिल कोई ,
हम में था लहरों से टकराने का दम, आर पार का दाव लगाने का जज्वा कोई
तुम्हारे हाथ में भूगोल की किताब है पढो मुझको
मुझको है मां से बिछुड़ जाने का गम . "

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